सेल्फ-ड्राइविंग कार (Self-Driving Car) एक ऐसा वाहन है जो बिना मानव चालक के हस्तक्षेप के या बहुत कम मदद से खुद सड़क पर चलने में सक्षम होता है। इन्हें स्वायत्त कार (Autonomous Car) या ड्राइवरलेस कार भी कहा जाता है।
यह कैसे काम करती है?
- सेंसर और कैमरे: कार के चारों ओर लगे कैमरे, रडार, और लिडार (LiDAR) आसपास की चीज़ों, जैसे अन्य गाड़ियों, ट्रैफिक लाइट और पैदल चलने वालों पर नज़र रखते हैं।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): कार का कंप्यूटर सिस्टम और मशीन लर्निंग मॉडल इन सभी डेटा को तुरंत समझता है और ब्रेक, स्टीयरिंग या एक्सीलरेटर को निर्देश देता है।
- एचडी मैप्स: सटीक नेविगेशन के लिए वाहन उच्च-परिभाषा नक्शों (HD Maps) का उपयोग करते हैं।
ऑटोमेशन के स्तर (Levels of Automation)
ऑटोमोटिव संस्था SAE के अनुसार, इसके 6 स्तर (Level 0 से Level 5) होते हैं:
- Level 0-2: इनमें सारा या अधिकांश नियंत्रण इंसान के पास होता है, केवल ड्राइवर की सहायता के लिए कुछ फीचर्स होते हैं।
- Level 3-4: कार खुद ड्राइव कर सकती है, लेकिन कुछ खास स्थितियों में इंसान का होना या नियंत्रण संभालना जरूरी होता है।
- Level 5: यह पूरी तरह से स्वतंत्र और स्वायत्त स्तर है, जहाँ किसी भी इंसान की जरूरत नहीं होती और गाड़ी कहीं भी चल सकती है। वर्तमान में इस स्तर की निजी कारें आम बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।

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